बाल साहित्य में नैतिक मूल्यों का महत्व: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन
Keywords:
बाल साहित्य, नैतिक मूल्य, आख्यान, चरित्र-निर्माण, हिंदी कथा-परंपरा, मूल्य-शिक्षाAbstract
बाल साहित्य केवल मनोरंजन की विधा नहीं है। वह बाल-मन के भावनात्मक, बौद्धिक और नैतिक निर्माण का सबसे सहज माध्यम भी है। यह शोध-पत्र विश्लेषणात्मक साहित्यिक पद्धति से दो प्रश्नों की पड़ताल करता है। पहला यह कि बाल साहित्य में नैतिक मूल्यों की उपस्थिति क्यों आवश्यक है। दूसरा यह कि वह किस रूप में सर्वाधिक प्रभावी होती है।
अध्ययन में जातक, पंचतंत्र, प्रेमचंद की कथा-परंपरा और गांधी के आत्मकथ्य के चयनित प्रसंगों का पाठ-विश्लेषण किया गया है। साथ ही मनोविज्ञान, साहित्य-चिंतन, शिक्षा-नीति और वैचारिक आलोचना के क्षेत्रों में हुए संबंधित शोधों की समीक्षा की गई है। निष्कर्ष बताते हैं कि नैतिक मूल्य तब सबसे अधिक स्थायी होते हैं जब वे उपदेश की भाषा में नहीं, पात्रों के अनुभव, द्वंद्व और चयन में अंतर्निहित हों। अध्ययन "अंतर्निहित नैतिकता" की अवधारणा और पाठ-मूल्यांकन की पाँच-प्रश्नीय कसौटी प्रस्तावित करता है।