कौटिल्य के अर्थशास्त्र में प्रतिपादित राजनीति और कूटनीति: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक अनुशीलन
Keywords:
कौटिल्य, अर्थशास्त्र, दण्डनीति, सप्तांग सिद्धान्त, मण्डल सिद्धान्त, षाड्गुण्य नीति, गुप्तचर, कूटनीतिAbstract
कौटिल्य का अर्थशास्त्र भारतीय राजशास्त्रीय चिन्तन का सबसे व्यवस्थित ग्रन्थ है। यह शासन, अर्थ, दण्ड, न्याय, गुप्तचर-व्यवस्था और अन्तर्राज्यीय सम्बन्धों को एक ही शास्त्रीय ढाँचे में प्रस्तुत करता है। यह शोध-पत्र विश्लेषणात्मक साहित्यिक पद्धति से इस ग्रन्थ की राजनीति और कूटनीति का अध्ययन करता है। इसमें मूल संस्कृत पाठ, हिन्दी और अंग्रेज़ी व्याख्याएँ, आधुनिक विद्वानों के शोध-निष्कर्ष और तुलनात्मक सामग्री का उपयोग हुआ है। पत्र का केन्द्रीय निष्कर्ष यह है कि कौटिल्य की राजनीति "प्रजा-सुख-केन्द्रित यथार्थवाद" है और उनकी कूटनीति "शक्ति-सन्तुलन पर आधारित सोपानबद्ध विवेक"। आलोचकों द्वारा प्रचारित "नैतिकता-विहीन छल-नीति" की छवि ग्रन्थ के सम्पूर्ण पाठ से पुष्ट नहीं होती। अध्ययन में यह भी दिखाया गया है कि मैकियावेली, सुन-त्ज़ू, थ्यूसिडाइडीज़ और आधुनिक यथार्थवादी सिद्धान्तों से तुलना करने पर कौटिल्य की मौलिकता और उनकी सीमाएँ, दोनों स्पष्ट होती हैं।