चरकसंहिता के अनुसार दिनचर्या और स्वस्थ जीवन का सिद्धांत: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन

Authors

  • Parhlad Singh Ahluwalia Author

Keywords:

चरकसंहिता, दिनचर्या, स्वस्थवृत्त, त्रिस्तम्भ, सम्यक् योग, प्रकृति, कालजैविकी

Abstract

स्वास्थ्य की रक्षा भारतीय चिकित्सा-परंपरा का प्राथमिक उद्देश्य रही है। चरकसंहिता ने इसे रोग-चिकित्सा से पहले स्थान दिया है। ग्रंथ का घोषित प्रयोजन है स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और रोगी के विकार का शमन। प्रस्तुत शोधपत्र में चरकसंहिता के सूत्रस्थान, विशेषतः मात्राशितीय, तस्याशितीय, नवेगान्धारणीय, इन्द्रियोपक्रमणीय, तिस्रैषणीय और अष्टौनिन्दितीय अध्यायों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है। उद्देश्य है दिनचर्या के शास्त्रीय स्वरूप, उसके सैद्धांतिक आधार और स्वस्थ जीवन की संकल्पना को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना।

अध्ययन में प्राथमिक स्रोत के रूप में चरकसंहिता और उसकी चक्रपाणि-कृत आयुर्वेददीपिका टीका को लिया गया है। तुलनात्मक स्रोत हैं सुश्रुतसंहिता, अष्टांगहृदय, भावप्रकाश, मनुस्मृति और श्रीमद्भगवद्गीता। द्वितीयक स्रोत के रूप में 2023 से पूर्व प्रकाशित हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी शोध-साहित्य का समीक्षात्मक अध्ययन किया गया है।

निष्कर्ष यह है कि चरकसंहिता में स्वास्थ्य को केवल रोग का अभाव नहीं माना गया है। यह दोष, अग्नि, धातु और मल की समता तथा आत्मा, इन्द्रिय और मन की प्रसन्नता की समन्वित अवस्था है। दिनचर्या का मूल तर्क शरीर की जैविक लयों को प्राकृतिक चक्र से संरेखित रखना है। आधुनिक कालजैविकी (chronobiology), निद्रा-विज्ञान, व्यायाम-विज्ञान और मौखिक स्वास्थ्य के अध्ययन इस तर्क का आंशिक समर्थन करते हैं। साथ ही कई शास्त्रीय विधाओं के लिए उच्च गुणवत्ता के नैदानिक प्रमाण अभी सीमित हैं।

 

Author Biography

  • Parhlad Singh Ahluwalia

    डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट एंड बिजनेस स्टडीज, जामिया हमदर्द, नई दिल्ली

     

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Published

2025-09-27

How to Cite

चरकसंहिता के अनुसार दिनचर्या और स्वस्थ जीवन का सिद्धांत: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन. (2025). थाती शोध पत्रिका, 2(4), 1-17. https://thati.net/index.php/thati/article/view/27

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