1947 मे भारत - पाक विभाजन का खरखौदा क्षेत्र पर प्रभाव
Keywords:
1947, भारत - पाक विभाजन, खरखौदाAbstract
1947 में ब्रिटिश भारत का बंटवारा एक महत्वपूर्ण घटना थी जिसका बहुत व्यापक प्रभाव खरखौदा के आसपास सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और जनता जनसंख्या पर हुआ। इस शोध पत्र में इस पर पड़े प्रभाव की समीक्षा की गई है।
विभाजन से पहले खरखौदा मुस्लिम मुख्यत सैयद परिवारों का शहर था जिन्हें अमीर भी कहा जाता था। खरखौदा का लिखित वर्णन लगभग 900 साल पहले मिलता है। फिरोजशाह तुगलक के समय (1351- 1388 ) खरखौदा का जिक्र आता है। मुगलों के समय में खरखौदा दिल्ली सरकार का एक परगना रहा है यहां पर शाही दरबार से विभिन्न आमिल नियुक्त होते रहते थे जो मुख्यत: मुस्लिम ही होते थे इसलिए यहां विशेष कर साथ वाले बड़े गांव हसनगढ़ में मुस्लिम जनसंख्या ज्यादा रहती थी। 1705 में सैयद हसमत अली को खरखौदा का जागीरदार बनाया उसको नवाब का खिताब दिया! सन 1710 में खरखौदा के आमिर को बंदा बहादुर ने भगा दिया तथा साथ वाले गांव सेहरी – खाण्डा में कुछ समय के लिए अपना मुख्यालय बना लिया था।
1792 में जींद के राजा गजपत सिंह के पुत्र भाग सिंह ने खरखौदा परगना को शाह आलम से ले लिया। 1819 में भाग सिंह की मृत्यु के बाद अंग्रेजो ने खरखौदा को सीधा अपने अधिकार में लिया खरखौदा को एक नई जागीर बनाया गया इसमें चार गांव थे हसनगढ़, कीडोली, पहलादपुर और खुरमपुर। यहां का एक नया जागीरदार बना इसका नाम था ताज मोहम्मद खान। 1857 की क्रांति के समय भी रिसालदार बिसारत अली एवं आसपास के गांव के योद्धाओं ने एक अहम भूमिका निभाई। 1924 में खरखौदा को रोहतक जिले में शामिल किया गया। क्रांति में इसका विशेष योगदान रहा। 1972 में खरखौदा को सोनीपत जिले में मिलाया गया। 2009 में एक हल्का बनाया गया। 2011 में सब डिवीजन बनाया गया। खरखौदा मे औरंगजेब द्वारा बनाई गई एक मस्जिद भी थी जो अब खंडहर हो चुकी है। यहां पर सैयद सूफी का मकबरा है जहां पर प्रतिवर्ष मेला लगता है। 2001 की जनगणना के अनुसार खरखौदा की जनसंख्या 18,758 थी एक तहसील के रूप में इसके 45 गांव हैं यहां पुरुषों की जनसंख्या 53% और महिलाओं की जनसंख्या 47% है।
3 जून 1947 में माउंटबेटन योजना के आधार पर भारत का विभाजन हुआ जिसके लिए 15 अगस्त 1947 का दिन निश्चित किया गया क्योंकि ब्रिटिश वायसराय लुईस माउंटबेटन ने दो नए राष्ट्रों के निर्माण की रस्मों में हिस्सा लेना था इसलिए 14 अगस्त को उन्होंने कराची में और 15 अगस्त को नई दिल्ली में सत्ता परिवर्तन की रश्में में अदा की परंतु भारत देश के इस विभाजन का करोड़ों लोगों पर बहुत प्रभाव पड़ा भारत में विभाजन के दौरान हुई हिंसा में दो से 5 लाख के करीब लोग मारे गए खरखौदा भी इस हिंसा से अछूता नहीं रहा यहां भी हजारों की संख्या में लोग मारे गए 1.45करोड़ की जनसंख्या शरणार्थी हो गई 72 लाख 26 हजार मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गए और 72 लाख 49 हजार हिंदू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत में आए पाकिस्तान से आए ज्यादातर शरणार्थी पश्चिम में और विशेष तौर पर पंजाब में बसे खरखौदा उस समय पंजाब का हिस्सा था तो यहां भी पाकिस्तान से आए लोगों को जमीन मिली और लोग यहां पर बसेवर्ष 1941 में जब ब्रिटिश सरकार ने अपने शासनकाल के दौरान अंतिम बार जनगणना कराई उस समय पंजाब की जनसंख्या 34.3 मिलियन थी तत्कालीन पंजाब में 29 जिले 45 रियासत 52047 गांव एवं 283 कस्बे शामिल थे अध्ययन के लिए खरखौदा तहसील को चुनाव जिसके अंतर्गत खरखौदा कस्बा एवं 44 गांव आनंदपुर, अशरफपुर-मटीडू, बरौना, बीधलान, छिनोली, फरमाना फिरोजपुर-बांगर, गढ़ी-सिसाना, गोपालपुर जटोला गोरड़ झरोठ झरोठी, झींजौली, कंवाली, किडोली, कतलूपुर, खंlडा, खेड़ी-दहिया, खुर्मपुर, कुंडल; मंडोरा, मंडोरी, मौजम नगर, नकलोई, नसीरपुर चोलका, निरथान, निजामपुर खुर्द, निजामपुर माजरा, पहलादपुर, पीपली, रामपुर, रिढाऊ, रोहण, सोहटी, सैदपुर, सेहरी, सिलाना, थाना कला, थाना खुर्द, तुर्कपुर, सिसाना गांव आते हैं।