पाणिनीय व्याकरण की आधुनिक भाषाविज्ञान में प्रासंगिकता: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक शोध-अध्ययन

Authors

  • वीना रानी Author

Keywords:

पाणिनि, अष्टाध्यायी, कारक, प्रत्याहार, स्फोट, संगणकीय भाषाविज्ञान, जनक-व्याकरण

Abstract

पाणिनि की अष्टाध्यायी विश्व की सबसे प्राचीन उपलब्ध औपचारिक भाषा-वर्णन-प्रणालियों में गिनी जाती है। यह अध्ययन विश्लेषणात्मक साहित्यिक पद्धति से यह जाँचता है कि पाणिनीय व्याकरण आधुनिक भाषाविज्ञान की किन शाखाओं (स्वनविज्ञान, रूपविज्ञान, वाक्यविज्ञान, अर्थविज्ञान, संगणकीय भाषाविज्ञान और भाषा-शिक्षण) में आज भी प्रासंगिक है। संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेज़ी में उपलब्ध लगभग साठ प्राथमिक और द्वितीयक स्रोतों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। निष्कर्ष यह है कि पाणिनीय प्रणाली आधुनिक भाषाविज्ञान की "पूर्वज" मात्र नहीं, एक सक्रिय सैद्धांतिक साझेदार भी है। उसके नियम-क्रम, संज्ञा-प्रत्याहार की मितव्ययिता, कारक-सिद्धांत और सूत्र-संघर्ष-समाधान की युक्तियाँ आज संगणकीय प्रक्रमण, निर्भरता-व्याकरण और संज्ञानात्मक भाषा-मॉडलों में उपयोगी सिद्ध हो रही हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह प्रासंगिकता असीमित नहीं है। पाणिनि का ग्रंथ एक विशिष्ट भाषा-रूप का वर्णन है, और आधुनिक सिद्धांतों से उसकी सीधी समानताएँ खींचते समय सावधानी आवश्यक है।

 

Author Biography

  • वीना रानी

    सहायक प्राध्यापिका, संस्कृत विभाग, राजकीय महाविद्यालय, हिसार, हरियाणा

     

     

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Published

2024-09-28

How to Cite

पाणिनीय व्याकरण की आधुनिक भाषाविज्ञान में प्रासंगिकता: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक शोध-अध्ययन. (2024). थाती शोध पत्रिका, 1(4), 27-40. https://thati.net/index.php/thati/article/view/16

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