श्रीमद्भगवद्गीता का कर्मयोग और आधुनिक जीवनशैली: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन

Authors

  • वीना रानी Author

Keywords:

गीता, कर्मयोग, निष्काम कर्म, समत्व, स्वधर्म, लोकसंग्रह, आधुनिक जीवनशैली, बर्नआउट, भारतीय मनोविज्ञान

Abstract

श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय चिंतन-परम्परा का ऐसा ग्रन्थ है जो युद्धभूमि के संकट में उपजा, पर जीवन-मात्र के संकटों का उत्तर बन गया। इस शोध-पत्र का उद्देश्य गीता में प्रतिपादित कर्मयोग की अवधारणा का पाठ-आधारित विश्लेषण करना और उसे आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों, अर्थात् कार्य-तनाव, परिणाम-केन्द्रित प्रतिस्पर्धा, बर्नआउट, अर्थहीनता-बोध और असंतुलित दिनचर्या के सन्दर्भ में परखना है। अध्ययन विश्लेषणात्मक साहित्यिक पद्धति पर आधारित है। इसमें मूल श्लोकों, संस्कृत-हिन्दी भाष्यों, आधुनिक भारतीय चिन्तकों की व्याख्याओं, पाश्चात्य विद्वानों के शोध और समकालीन मनोविज्ञान एवं प्रबन्धन-साहित्य का तुलनात्मक पाठ किया गया है। निष्कर्ष यह है कि गीता का कर्मयोग "कर्म-त्याग" नहीं, "कर्म में कौशल" (योगः कर्मसु कौशलम्) का दर्शन है। इसके चार स्तम्भ हैं: कर्म में अधिकार, फलासक्ति का त्याग, सिद्धि-असिद्धि में समत्व और लोकसंग्रह का भाव। ये स्तम्भ आत्म-निर्धारण सिद्धान्त, प्रवाह-अवस्था, अर्थ-केन्द्रित मनोविज्ञान और सजगता-आधारित तनाव-प्रबन्धन जैसी आधुनिक अवधारणाओं से गहरी संगति रखते हैं। साथ ही कर्तव्य-नीति, स्वधर्म की व्याख्या और सामाजिक सन्दर्भ को लेकर कुछ वैचारिक सीमाएँ और विवाद भी हैं, जिनका निष्पक्ष विवेचन यहाँ किया गया है।

 

Author Biography

  • वीना रानी

    सहायक प्राध्यापिका, संस्कृत विभाग, राजकीय महाविद्यालय, हिसार, हरियाणा

     

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Published

2025-03-24

How to Cite

श्रीमद्भगवद्गीता का कर्मयोग और आधुनिक जीवनशैली: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन. (2025). थाती शोध पत्रिका, 2(2), 1-18. https://thati.net/index.php/thati/article/view/22

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