वैदिक साहित्य में पर्यावरण संरक्षण का संदेश: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन

Authors

  • वीना रानी Author

Keywords:

वैदिक साहित्य; पर्यावरण संरक्षण; ऋत; पृथिवी सूक्त; यज्ञ; सतत विकास; तुलनात्मक अध्ययन; पारिस्थितिक चिंतन

Abstract

यह शोध-पत्र वैदिक साहित्य (संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद) में निहित पर्यावरण-चेतना का विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन का आधार ऋग्वेद, अथर्ववेद, शुक्ल यजुर्वेद और प्रमुख उपनिषदों के चयनित पाठ हैं। उत्तरवर्ती स्मृति, पुराण, आयुर्वेद और अर्थशास्त्र की परंपरा को निरंतरता के प्रमाण के रूप में लिया गया है। पद्धति पाठ-विश्लेषण, विषय-वस्तु विश्लेषण और तुलनात्मक व्याख्या पर टिकी है। निष्कर्ष यह है कि वैदिक चिंतन पृथ्वी, जल, वायु, वनस्पति और प्राणि-जगत को उपभोग की वस्तु नहीं, सहभागी सत्ता मानता है। इस चिंतन के तीन आधार हैं: ऋत (सृष्टि-व्यवस्था), यज्ञ (आदान-प्रदान का चक्र) और त्याग-पूर्वक भोग (संयम)। तुलनात्मक विश्लेषण में जैन, बौद्ध, ईसाई, इस्लामी और गहन-पारिस्थितिकी परंपराओं से साम्य और भेद दिखाए गए हैं। साहित्य-समीक्षा और आलोचनात्मक दृष्टिकोणों के आधार पर यह भी रेखांकित किया गया है कि वैदिक पर्यावरण-चिंतन मुख्यतः नैतिक-आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत है, आधुनिक अर्थ में तकनीकी संरक्षण-विज्ञान नहीं। आदर्श और व्यवहार के बीच के अंतराल को भी ईमानदारी से स्वीकार किया गया है।

 

Author Biography

  • वीना रानी

    सहायक प्राध्यापिका, संस्कृत विभाग, राजकीय महाविद्यालय, हिसार, हरियाणा

     

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Published

2025-03-24

How to Cite

वैदिक साहित्य में पर्यावरण संरक्षण का संदेश: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन. (2025). थाती शोध पत्रिका, 2(2), 19-36. https://thati.net/index.php/thati/article/view/23

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