उपनिषदों में अद्वैत दर्शन: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • वीना रानी Author

Keywords:

उपनिषद्, अद्वैत, ब्रह्म, आत्मा, माया, महावाक्य, शांकर भाष्य, मोक्ष

Abstract

यह शोध-पत्र उपनिषद्-साहित्य में निहित अद्वैत-चिन्तन का विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन है। शोध का केन्द्रीय प्रश्न यह है कि उपनिषदों में अद्वैत का स्वरूप कितना स्पष्ट, सुसंगत और मूलपाठ-सम्मत है, और परवर्ती भाष्य-परम्परा ने उसे किस सीमा तक विकसित या पुनर्व्याख्यायित किया। अध्ययन में बृहदारण्यक, छान्दोग्य, ईश, केन, कठ, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय और श्वेताश्वतर उपनिषद् के प्रमुख मन्त्रों का पाठ-विश्लेषण किया गया है। साथ ही गौड़पाद और शंकराचार्य की भाष्य-दृष्टि, रामानुज तथा मध्व की असहमतियाँ, बौद्ध दर्शन से सम्बन्ध, नव-वेदान्त की व्याख्या, मार्क्सवादी और आर्यसमाजी आलोचना और पाश्चात्य दर्शन से तुलना भी परखी गई है। निष्कर्ष यह है कि उपनिषदों में अद्वैत के बीज, प्रतिपादन और उसकी चरम अभिव्यक्ति (विशेषतः बृहदारण्यक, छान्दोग्य और माण्डूक्य में) स्पष्ट रूप से विद्यमान हैं। किन्तु उपनिषद् एकरेखीय व्यवस्थित दर्शन नहीं, बहुस्तरीय चिन्तन-धारा हैं। इसी कारण मायावाद जैसे प्रश्नों पर मतभेद की गुंजाइश बनी रहती है। अद्वैत को उपनिषदों की "एकमात्र" व्याख्या मानने के बजाय उसे सर्वाधिक सुसंगत और प्रभावशाली व्याख्याओं में से एक मानना अधिक तर्कसंगत है।

 

Author Biography

  • वीना रानी

    सहायक प्राध्यापिका, संस्कृत विभाग, राजकीय महाविद्यालय, हिसार, हरियाणा

     

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Published

2025-12-24

How to Cite

उपनिषदों में अद्वैत दर्शन: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. (2025). थाती शोध पत्रिका, 3(1), 1-18. https://thati.net/index.php/thati/article/view/29

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