अष्टांग योग और मानसिक स्वास्थ्य में इसकी उपयोगिता: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक शोध अध्ययन

Authors

  • वीना रानी Author

Keywords:

अष्टांग योग, पतंजलि योगसूत्र, मानसिक स्वास्थ्य, चित्तवृत्ति निरोध, ध्यान, प्राणायाम

Abstract

वर्तमान युग तनाव, चिंता, अवसाद तथा मानसिक असंतुलन का युग बन चुका है। भौतिकवादी जीवन-शैली, प्रतिस्पर्धा, सामाजिक असुरक्षा और तकनीकी अतिभार ने मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ऐसी परिस्थिति में महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग—यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि—एक समग्र और वैज्ञानिक जीवन-पद्धति के रूप में विशेष प्रासंगिकता रखता है।(1) प्रस्तुत शोध-पत्र विश्लेषणात्मक साहित्यिक पद्धति (Analytical Literary Research Method) पर आधारित है, जिसमें प्राचीन संस्कृत ग्रंथों, हिन्दी भाष्यों तथा समकालीन शोध-साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से यह स्थापित करने का प्रयास किया गया है कि अष्टांग योग के आठों अंग किस प्रकार मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों—चिंता-नियंत्रण, भावनात्मक स्थिरता, संज्ञानात्मक स्पष्टता तथा आत्म-साक्षात्कार—में सहायक सिद्ध होते हैं। अध्ययन में विभिन्न विद्वानों के मतों का तुलनात्मक विश्लेषण, प्रासंगिक श्लोकों का उद्धरण तथा भारतीय एवं पाश्चात्य दृष्टिकोणों का समन्वय प्रस्तुत किया गया है। निष्कर्षतः यह पाया गया कि अष्टांग योग केवल शारीरिक व्यायाम की पद्धति नहीं, अपितु एक सम्पूर्ण मनोवैज्ञानिक चिकित्सा-प्रणाली है, जो आधुनिक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान हेतु अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

 

Author Biography

  • वीना रानी

    सहायक प्राध्यापिका, संस्कृत विभाग, गुरु गोरखनाथ जी राजकीय महाविद्यालय, हिसार, हरियाणा

     

     

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Published

2026-03-23

How to Cite

अष्टांग योग और मानसिक स्वास्थ्य में इसकी उपयोगिता: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक शोध अध्ययन. (2026). थाती शोध पत्रिका, 3(2), 1-13. https://thati.net/index.php/thati/article/view/30

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