संस्कृत भाषा और कंप्यूटर/आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अंतरसंबंध: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन
Keywords:
संस्कृत भाषा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पाणिनीय व्याकरण, प्राकृतिक भाषा संसाधन, मशीन अनुवाद, ज्ञान-निरूपण, संगणनात्मक भाषाविज्ञानAbstract
प्रस्तुत शोध-पत्र संस्कृत भाषा की संरचनात्मक, ध्वन्यात्मक तथा व्याकरणिक विशेषताओं और आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के मध्य विद्यमान अंतरसंबंधों का विश्लेषणात्मक साहित्यिक (Analytical Literary) पद्धति से अध्ययन करता है। पाणिनि की अष्टाध्यायी को विश्व के प्रथम औपचारिक (Formal) व्याकरण-तंत्र के रूप में स्वीकार करते हुए यह पत्र दर्शाता है कि किस प्रकार सूत्र-शैली, अनुबंध-व्यवस्था तथा कारक-सिद्धान्त आधुनिक प्रोग्रामिंग भाषाओं की संरचना, अल्गोरिद्म तथा ज्ञान-निरूपण (Knowledge Representation) प्रणालियों से साम्य रखते हैं। रिक ब्रिग्स के 1985 के बहुचर्चित शोध-पत्र से लेकर समकालीन संस्कृत-कम्प्यूटेशनल-भाषाविज्ञान (Sanskrit Computational Linguistics) परियोजनाओं तक के साहित्य की समीक्षा करते हुए यह पत्र विभिन्न विद्वानों के मतों, उनके शोध-परिणामों तथा आलोचनात्मक दृष्टिकोणों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। साथ ही यह पत्र संस्कृत की अस्पष्टता-रहित (Unambiguous) संरचना, मशीन अनुवाद, प्राकृतिक भाषा संसाधन (NLP) तथा बड़े भाषा मॉडल (LLM) प्रशिक्षण में संस्कृत की संभावित उपयोगिता एवं उसकी सीमाओं की समीक्षा करता है। निष्कर्षतः यह अध्ययन स्थापित करता है कि संस्कृत भाषा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अंतरसंबंध केवल एक लोकप्रिय मिथक नहीं, अपितु भाषाविज्ञान, तर्कशास्त्र एवं संगणनात्मक विज्ञान के अंतर्विषयक अध्ययन का एक वैध एवं उर्वर क्षेत्र है, जिसे यथोचित सतर्कता तथा वैज्ञानिक निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।