संस्कृत साहित्य में नारी पात्रों की स्थिति और विकास: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन

Authors

  • वीना रानी Author

Keywords:

संस्कृत साहित्य, नारी पात्र, रामायण, महाभारत, कालिदास, स्त्री-चित्रण, तुलनात्मक अध्ययन

Abstract

संस्कृत साहित्य भारतीय सांस्कृतिक चेतना का वह अक्षय स्रोत है जिसमें नारी को अनेक रूपों में चित्रित किया गया है — कहीं वह देवी के रूप में पूज्य है, कहीं पत्नी और माता के रूप में आदर्श है, तो कहीं स्वतंत्र चिंतनशील व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत हुई है। प्रस्तुत शोधपत्र वैदिक साहित्य से लेकर रामायण, महाभारत, कालिदास, भास, भवभूति तथा बाणभट्ट जैसे रचनाकारों की कृतियों तक नारी पात्रों की स्थिति एवं उसके ऐतिहासिक विकास-क्रम का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। शोध में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि संस्कृत साहित्य में नारी-चित्रण एकरेखीय नहीं, बल्कि बहुआयामी और युगानुरूप परिवर्तनशील रहा है। वैदिक युग में नारी को अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता और शैक्षणिक अधिकार प्राप्त थे, जबकि स्मृति-काल में सामाजिक बंधन सुदृढ़ हुए, परंतु काव्य-नाट्य साहित्य में नारी का चरित्र-चित्रण भावनात्मक गहराई, बौद्धिक तीक्ष्णता और नैतिक दृढ़ता से संपन्न होता चला गया। शोध पद्धति के रूप में विश्लेषणात्मक साहित्यिक (Analytical Literary) उपागम अपनाया गया है, जिसमें मूल संस्कृत ग्रंथों के श्लोकों का उद्धरण, उनका भावार्थ-विश्लेषण तथा तुलनात्मक अध्ययन सम्मिलित है। निष्कर्षतः यह अध्ययन प्रमाणित करता है कि संस्कृत साहित्य में नारी केवल पुरुष-केंद्रित कथा की सहायक पात्र नहीं, अपितु अनेक स्थलों पर कथा-नायिका, नैतिक विवेक की प्रतिनिधि और सामाजिक आदर्श की संवाहिका रही है।

 

Author Biography

  • वीना रानी

    सहायक प्राध्यापिका, संस्कृत विभाग, गुरु गोरखनाथ जी राजकीय महाविद्यालय, हिसार, हरियाणा

     

     

Downloads

Published

2026-06-29

How to Cite

संस्कृत साहित्य में नारी पात्रों की स्थिति और विकास: एक विश्लेषणात्मक साहित्यिक अध्ययन. (2026). थाती शोध पत्रिका, 3(3), 12-21. https://thati.net/index.php/thati/article/view/33

Most read articles by the same author(s)

1 2 > >>